राजस्थान में 'दो बच्चों' की चुनावी बाध्यता खत्म: विधानसभा में पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस, 31 साल पुराने कानून में बदलाव
Rajasthan ends two-child electoral requirement
जयपुर: Rajasthan ends two-child electoral requirement, राजस्थान विधानसभा में सोमवार को राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इस विधेयक के पारित होने के साथ ही पंचायत चुनाव लड़ने के लिए लागू दो बच्चों की बाध्यता का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। यानी दो से अधिक संतान वाले लोग भी चुनाव लड़ सकेंगे। उल्लेखनीय है कि विधेयक को मंजूरी मिलने से पहले विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बहस हुई। सदन ने बहस के बाद विधेयक पारित हो गया। विपक्ष की तरफ से पक्ष रखते हुए गोविन्द सिंह डोटासरा ने कई सवाल उठाए। उन्होंने पूर्व सीएम भैरोंसिंह शेखावत को याद करते हुए सरकार पर निशाना साधा।
विपक्ष ने किया प्रहार
पंचायती राज संशोधन बिल पर बहस के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राजस्थान पंचायती राज संशोधन बिल पर कहा कि बीजेपी सरकार पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत का अपमान कर रही है, जिन्होंने 1990 में जनसंख्या नियंत्रण के चलते यह कानून बनाया था। आज 30 साल के बाद भाजपा की सरकार ही इस कानून में बदलाव करने जा रही है। तब इस कानून के पीछे मंशा यही थी कि जनसंख्या नियंत्रण किया जाए। क्या अब जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत नहीं है जो सरकार संशोधन विधेयक लेकर आई है, क्या अब हमारे पास इतने संसाधन हो गए हैं कि जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत नहीं है? क्या केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार को जनसंख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं?
डोटासरा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देश में 70 फीसदी ग्रामीण परिवेश के लोग हैं वो भी आज जनसंख्या नियंत्रण को लेकर पूरी तरह से जागरूक नहीं है। इस सरकार के पास कोई विजन नहीं है, कुछ नेताओं ने कह दिया कि दो बच्चों वाला नियम हटाना है, क्योंकि उनके तीन चार बच्चे हैं, इसलिए सरकार आनन-फानन में यह बिल लेकर आई है।
दिलावर ने भी सदन में रखी बात
इस दौरान सदन में पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह प्रावधान उस समय लाया गया था, जब देश और प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार बहुत तेज थी। यह नियम करीब 31 साल पहले लागू किया गया था। वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व वाली सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता का प्रावधान लागू किया था। उस समय इसका उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना और छोटे परिवार के संदेश को बढ़ावा देना था।
ऐसे में अब यह पुराना प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों में प्रासंगिक नहीं रहा है। अब बदलती सामाजिक परिस्थितियों और जनसंख्या वृद्धि दर में आई कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने इस नियम को समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इस शर्त के कारण कई योग्य और अनुभवी लोग केवल दो से अधिक बच्चों के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते थे। नए संशोधन के बाद ऐसे लोगों को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिल सकेगा।